सड़क पर बिखरे लहू का रंग तो एक,
फिर भी कोई हिंदू, कोई मुसलमान, सबकी पहचान अनेक।
भारत मां के सपूतों, क्यों आपस में लड़ मरते हो?
एकता में ही शक्ति है, यह जानकर भी वही गलती बार बार करते हो?
जैसे पांच उंगलियां मिलकर मुठ्ठी बन जाती है,
वैसे ही साथ रहने से दुश्मन की छुट्टी हो जाती है।
चंद्रयान की टीम का उदाहरण श्रेष्ठ है,
कंधे से कंधा मिलाकर चलने का हुनर होना ही सर्वश्रेष्ठ है।
दुगना होंसला लेकर कोशिशें तो हमारी जारी रहेगी,
निष्फल को सफल बनाने के लिए हर तरह की तैयारी रहेगी।
अरे वो भी तो चांद है, नखरे तो दिखाएगा,
इरादे हमारे भी मजबूत है, वो रोक नही पाएगा।
चांद तो क्या उसके आगे भी हम जाएंगे,
हम भारतवासी हर ग्रह पर अपना तिरंगा लहराएंगे।
– श्री ऐ.ऐस.यादव की कलम से.... ✍🏻
{Written on September 13, 2019}